Tuesday, December 23, 2014
 

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हे भारत की देवियों ! अपने स्वर्णिम अतीत को याद करो | सुलभा, गार्गी, शबरी, शाण्डिली, मुक्ताबाई, जनाबाई जैसी सन्नारियों के दिव्य आदर्शों को अपने जीवन में उतारते हुए जीवन के महान लक्ष्य की ओर अग्रसर हो | तुम भी चाहो तो अनुचित खान-पान, संगदोष आदि से बचकर सद्गुरु के निर्देशानुसार साधना करके जीवन पथ पर आगे बढ़ सकती हो और अपनी सुषुप्त शक्तियों को जागृत कर सकती हो |

- पूज्य बापूजी

( १ ) युवतियों एवं महिलाओं का शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक विकास |
( २ ) उनके माध्यम से बच्चों में सुसंस्कारो का सिंचन एवं उन्नत भावी पीढ़ी का निर्माण |
( ३ ) नारियों को पारिवारिक उन्नति का मार्गदर्शन देकर सुन्दर समाज का निर्माण |
( ४ ) भारतीय संस्कृति की सर्वहितकारी परम्पराओं का वैज्ञानिक आधार बताकर उन्हें अपनाने व प्रचारित करने का पथप्रदर्शन करना |   
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 यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता: - अर्थात जहाँ नारी की पूजा होती हैं, जहाँ उसे सम्मान मिलता है, वहाँ देवताओं का वास होता है | हमारी संस्कृति की रक्षा करने में भारतीय नारी का कितना महान योगदान है, इसका प्रमाण हमे अपने इतिहास से स्पस्ट रूप से मिल जाता है | जिस घर की नारियाँ सत्यप्रिय, सदाचारी, संयमी और ईश्वरभक्त होती है, उसी घर में महान आत्माओं का अवतरण होता है | यदि वह अपनी महिमा को जान ले तो पापात्मा को भी सज्जन बना सकती है | इसलिए नारी में दैवी संपदा के सदगुणों का होना आवश्यक है |  अधिक जाने..  



वेणाबाई की गुरुनिष्ठावेणाबाई की गुरुनिष्ठा
वेणाबाई की गुरुनिष्ठा एक बार समर्थ रामदासजी मिरज गाँव (महाराष्ट्र) पधारे | वहाँ उन्होंने किसी विधवा कन्या को तुलसी के वृंदावन (गमले) के पास कोई ग्रंथ पढ़ते देख पूछा : “कन्या! कौन-सा ग्रंथ पढ़ रही हो?” “एकनाथी भागवत |” “ग्रंथ तो अच्छा खोजा हैं किंतु उसका भागवत धर्म समझा क्या ?” “स्वामीजी ! मुझे भोली-भ...
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भक्तिदात्री पाँच महान नारियाँ – भक्तिदात्री पाँच महान नारियाँ –
भक्तिदात्री पाँच महान नारियाँ – - पूज्य बापूजी ‘श्रीमद भागवत’ में पाँच महान महिलाओं की बात आती है : पहली भक्त महिला है द्रोपदी - द्रोपदी भगवान् को बोलती है, ”प्रभु ! आपको मेरी सहायता में रहना ही पड़ेगा क्योंकि आप मेरे सखा हो, मेरे संबंधी हो, मेरे स्वामी भी हो और मेरे सर्वस्व हो | मैं आपको नहीं पुकार...
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हनुमानजी को माँ से मिली अनुपम शिक्षा :- संतान की प्रथम शिक्षिका माँ ही होती है । इतिहास इस बात का साक्षी है कि आदर्श माताएँ अपनी संतान को श्रेष्ठ एवं आदर्श बना देती हैं । पुराण आदि सत्शास्त्रों में ऐसे अनेकों उदाहरण मिलते हैं । माँ के जीवन और उसकी शिक्षा का बालक पर सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। माँ संता...
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माँ सुमित्रा की अनुपम सीख :-माँ सुमित्रा की अनुपम सीख :-
माँ सुमित्रा की अनुपम सीख :- भगवान श्री रामचन्द्र जी को ‘चौदह वर्ष का वनवास मिला। लक्ष्मणजी ने उनसे कहा: ‘‘प्रभु! मैं भी आपके साथ चलूँगा। “श्रीरामजी ने कहा: ‘‘जाओ, माँ से विदा माँग आओ, उनसे आशीर्वाद ले आओ।” लक्ष्मणजी ने माँ सुमित्रा को प्रणाम कर कहा: ‘‘माँ! मैं प्रभु श्रीरामजी की सेवा में वन जा रहा...
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Announcement
 युवती संस्कार सभाओं का आयोजन कैसे करे ?

'युवती संस्कार सभा' नारियों के आत्मविकास एवं सम्मानित जीवन-निर्माण के लिये है | इसका आयोजन सप्ताह में एक बार रविवार के दिन और पर्व व छुटियों के दिनों में  अधिक जानें >>