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divya shishu sanskar
8/10/2012 2:58:00 AM
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7/15/2012 5:48:00 AM
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7/15/2012 4:31:00 AM


संस्कारों का महत्त्व :-

संस्कारों का महत्त्व :-

संस्कार अर्थात् मनुष्य के मनोदैहिक तंत्र पर पड़ी उसके कर्मों की छाप। संस्कार अव्यक्तरूप से प्राणी में विद्यमान रहते हैं। इनकी शक्ति बड़ी प्रबल होती है। ये प्राणी के चेतन व अचेतन व्यवहार को अनजाने में ही प्रभावित करते रहते हैं। अनुकूल अवसर मिलते ही ये सूक्ष्म संस्कार पुनः स्थूल वृत्तियों का रूप धारण कर लेते हैं और मनुष्य के व्यवहार में व्यक्त होने लगते हैं। जैसे जिसके संस्कार, वैसा ही उसका आचरण होता है। अतः हिन्दू संस्कृति में संस्कारों की ओर अत्यधिक ध्यान दिया गया है।
वेदों तथा शास्त्रों में सुखी, स्वस्थ व सुसंपन्न जीवन के लिए सोलह संस्कारों का वर्णन आता है। इनमें एक प्रमुख संस्कार है – जातकर्म संस्कार। बालक के जन्म के बाद उसे शरीर, मन व बुद्धि से स्वस्थ रखने के लिए जो भी आवश्यक कर्म किये जाते हैं उन्हें जातकर्म संस्कार कहते हैं।



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