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नीलगिरी के वृक्ष भूल से भी न लगाएँ, ये जमीन को बंजर बना देते हैं | जिस भूमि पर ये लगाये जाते हैं उसकी शुद्धि १२ वर्ष बाद होती है, ऐसा माना जाता है | इसकी शाखाओं पर ज्यादातर पक्षी घोंसला नहीं बनाते, इसके मूल में प्रायः कोई प्राणी बिल नहीं बनाते, यह इतना हानिकारक, जीवन – विघातक वृक्ष है | हे समझदार मनुष्यो ! पक्षी एवं प्राणियों जितनी अक्ल तो हमें रखनी चाहिए | हानिकर वृक्ष हटाओ और तुलसी, पीपल, आँवला आदि लगाओ |
           


स्वास्थ्य एवं पर्यावरण रक्षक प्रकृति के अनमोल उपहार :-

अन्न, जल और वायु हमारे जीवन के आधार हैं | सामान्य मनुष्य प्रतिदिन औसतन १ किलो अन्न और २ किलो जल लेता है परन्तु इनके साथ वह करीब १०,००० लीटर (१२ से १३.५ किलो) वायु भी लेता है | इसलिए स्वास्थ्य की सुरक्षा हेतु शुद्ध वायु अत्यंत आवश्यक है | प्रदूषणयुक्त, ऋण – आयनों की कमी  वाली ओजोनरहित हवा से रोगप्रतिकारक शक्ति का ह्रास होता है व कई प्रकार की शारीरिक-मानसिक बीमारियाँ होती हैं | सन १९७६ की तुलना में वर्तमान समय में दमे के मरीज दुगुने हो गए हैं | हर ९ में से १ बच्चा दमे से पीड़ित है | दमे के कारण मरनेवालों की संख्या वयस्कों में तीन गुनी हो गयी है और ५ से ९ वर्ष की उम्र के बच्चों में ४ गुनी हो गयी है | पीपल का वृक्ष दमानाशक, हृदयपोषक, ऋण – आयनों का खज़ाना, रोगनाशक, आह्लाद व मानसिक प्रसन्नता का खजाना तथा रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ानेवाला है | बुद्धू बालकों तथा हताश – निराश लोगों को भी पीपल के स्पर्श एवं उसकी छाया में बैठने से अमित स्वास्थ्य लाभ व पुण्य लाभ होता है | पीपल की जितनी महिमा गायें, कम है | पर्यावरण की शुद्धि के लिए जनता – जनार्दन व सरकार को बबूल, नीलगिरी (यूकेलिप्टस) आदि जीवनी शक्ति का ह्रास करने वाले वृक्ष सड़कों एवं अन्य स्थानों से हटाने चाहिए और पीपल, आंवला, तुलसी, वटवृक्ष व नीम के वृक्ष दिल खोल के लगाने चाहिये | इससे अरबों रुपयों की दवाईयों का खर्च बच जायेगा | ये वृक्ष शुद्ध वायु के द्वारा प्राणिमात्र को एक प्रकार का उत्तम भोजन प्रदान करते हैं | पूज्य बापूजी कहते हैं की ये वृक्ष लगाने से आपके द्वारा प्राणिमात्र की बड़ी सेवा होगी | यह लेख पढ़ने के बाद सरकार में अमलदारों व अधिकरियों को सूचित करना भी एक सेवा होगी | खुद वृक्ष लगाना और दूसरों को प्रेरित करना भी एक सेवा होगी |