युवती संस्कार सभाओं का आयोजन :

उम्र : १७ से ४० वर्ष  समय : १ घंटा ३० मिनट

'युवती संस्कार सभा' नारियों के आत्मविकास एवं सम्मानित जीवन-निर्माण के लिये है | इसका आयोजन सप्ताह में एक बार रविवार के दिन और पर्व व छुटियों के दिनों में करे ताकि अधिक-से- अधिक महिलाये इससे लाभान्वित हो | 


संस्कार सभा की पूर्व तैयारी : पूर्व-तैयारी की जिम्मेदारी कुछ बहनें आपस में बाँट ले | वे सभा हेतु निश्चित किये गये स्थान पर सभा से पूर्व उपस्थित होकर साफ-सफाई कर ले | फिर सारी आवश्यक सामग्रियां एकत्र कर ले एवं पवित्र व ऊँचे स्थान पर पूज्यश्री का श्रीचित्र रखे | संस्कार सभा के कार्यक्रम की जानकारी देने हेतु सभा से पूर्व उसके कार्यक्रमों की रुपरेखा का सूचनापटल अवश्य तैयार करे |


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Program held at Medical college of Ahmedabad, Gujarat ( physiotherapy section)
1/22/2013 1:00:00 AM
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Program held at Medical college of Ahmedabad, Gujarat ( physiotherapy section)
1/22/2013 12:59:00 AM
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Program held at Medical college of Ahmedabad, Gujarat ( physiotherapy section)
1/22/2013 12:43:00 AM
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Program held at Medical college of Ahmedabad, Gujarat ( physiotherapy section)
1/22/2013 12:30:00 AM
Yuvati Sanskar Sabha 1
2/3/2012 11:15:00 AM
Yuvati Sanskar Sabha 2
2/3/2012 11:12:00 AM
Yuvati Sanskar Sabha 3
2/3/2012 11:10:00 AM

संस्कार सभा का आदर्श :

* अपना व्यवहार मधुर रखे | कटु वचनों का प्रयोग, निंदा, ईर्ष्या, अभिमान, स्वार्थ, कपट आदि दुर्गुणों से बचे |
* सबको प्रोत्साहित करते हुये प्रेरणा, सौहार्द और मिल जुलकर निर्णय करना आदि सदगुणों का विकास करे |
* व्यर्थ की चर्चा न करते हुये समय का सदुपयोग करे |
* पूज्यश्री के दैवी सेवाकार्यों का लाभ अधिकतम लोगों तक कैसे पहुंचे इस पर विचार-विमर्श करे |
* बिमा कंपनी के स्वार्थी लोग, एजेंट (दलाल), वकील, डॉक्टर अपनी संस्था का गलत फायदा न उठाये, इसकी सतर्कता अवश्य रखे |
* जिन्हें पूज्यश्री से दीक्षा मिली हो वे अपनी नियम की सामग्री अवश्य लाये तथा सभा से ५ मिनट पूर्व उपस्थित हो |


सभा की रुपरेखा : Minimize
१. शुभारम्भ :
हरि  ॐ का गुंजन ( ११ बार ) : सभी लोग पद्मासन या सुखासन में बैठे | हाथ ज्ञानमुद्रा में रखकर गहरा श्वास भरते हुये 'हरी ॐ' का दीर्घ गुंजन करे |
प्रभाव : 'हरि ' के साथ यदि 'ॐ' मिलकर उच्चारण किया जाय तो हमारी पाँचों ज्ञानेन्द्रियों पर अच्छा असर पड़ता है | केवल सात बार 'हरि ॐ' का गुंजन करने से मूलाधार केंद्र में स्पंदन होते है और कई रोगों के कीटाणु भाग जाते है | मन की चंचलता दूर होती है | इस गुंजन से शरीर में आंदोलन होंगे, रजो -तमोगुण क्षीण होने लगेगा, प्राण तालबद्ध होंगे, मन शांत होगा और आनंद आने लगेगा |
प्रार्थना : सभी मिलकर प्रार्थना करेंगे |
गुरुर्ब्रम्हा गुरुर्विष्णु: गुरुर्देवो महेश्वर: |
गुरुर्साक्षात परब्रम्ह तस्मै श्री गुरवे  नम :||
ध्यानमुलं गुरुर्मुति  पूजामूलं गुरो: पदम् |
मंत्रमूलं गुरुर्वाक्यं मोक्षमूलं गुरो: कृपा ||
अखंडमंडलाकारं व्याप्तं येन चराचरम् |
तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नम: ||
त्वमेव माता च पिता त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव |

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव सर्व मम देव देव ||
ब्रम्हानंद परमसुखदं केवलं ज्ञानमूर्ति
द्वंदातीतं गगनसदृशं तत्वंमस्यादिलक्ष्यम् |
एकं नित्यं विमलमचलं सर्वधिसाक्षिभूतं 
भावातीतं त्रिगुणरहितं सदगुरुं तं नमामि ||
  (१० मिनट)
2. यौगिक   प्रयोगों :  
आधुनिकता की दौड़ में हो रहे स्वास्थ्य के ह्रास से बचने और शरीर व मन को स्वस्थ तथा सबल बनाये रखने हेतु यौगिक प्रयोगों का दैनिक करना चाहिये |
लाभ :  शरीरबल, मनोबल, स्मरणशक्ति एवं आत्मविश्वास का अदभुत विकास होता है तथा रोगप्रतिकारक शक्ति बढती है |
* योगासन : ताडासन, सर्वागासन, सिद्धासन, पद्मासन, पादपश्चिमोत्तानासन, वज्रासन, शशांकासन, सूर्यनमस्कार आदि| इस हेतु आश्रम से प्रकाशित पुस्तक ‘योगासन’ देखे | योगासन शुरू करने से पूर्व उसकी विधि व लाभ एक ऐसी बहन द्वारा बताया जाय जिसे अधिकांश योगासनों की पूर्ण जानकारी हो | प्रत्येक आसन दो सभाओं तक सिखाया जाये| सभा में नये सदस्यों के प्रवेश लेने पर उनकी प्रारम्भिक तीन–चार सभाओं में उनसे सरल योगासन अथवा यौगिक प्रयोग ही करवाये| कुछ सभाओं के बाद योगासन के पहले सूर्यनमस्कार का अभ्यास करवाये | सर्वप्रथम इसकी विशेषता एवं लाभ सबको पढ़ के सुनाये |दो सभाओं में एक ही आसन कराये |
* प्राणायाम : सभा में प्राणायाम शुरू करने से पूर्व प्राणायाम के लाभ, नियम व परिचय आदि सबको पढ़ के सुनाये| पहले अनुलोम-विलाम प्राणायाम करवाये–सिद्धासन, सुखासन या पद्मासन में बैठकर दोनों नथुनों से खूब गहरा श्वास लेकर अंदर रोके रखे (६० से ७५ सेकंड तक) | फिर धीरे-धीरे श्वास छोड़ दे | दो–चार सामान्य श्वास लेकर श्वास को बाहर ही रोके रखे (३० से ४५ सेकंड तक) फिर श्वास ले ले | यह एक प्राणायाम है | ऐसे तीन प्राणायाम करे|
त्रिबंध : इसमें तीन बंध होते है :
(क) मूलबंध अर्थात गुदाद्वार का संकोचन |
(ख) उड्डीयान बंध अर्थात पेट को अंदर की तरफ खींचना |
(ग) जालंधर बंध : ठोड़ी को कंठ की तरफ दबाना | इसे श्वास बाहर रोककर ४५ सेकंड तक करे| त्रिबंध सहित प्राणायाम करने से बहुत लाभ होता है|  
सावधानी:प्राणायाम को हठपूर्वक नहीं करना चाहिये | महिला उत्थान मंडल में आयी नई बहनों को अपनी क्षमता के अनुसार ही कुम्भक का अभ्यास करना चाहिये |
यौगिक प्रयोग : टंक विद्या, बुद्धिशक्ति–मेधाशक्तिवर्धक प्रयोग | योगासन के बाद ये दो प्रयोग विधिवत कराये| प्रयोग व इनके लाभ पढकर सुनाये ( देखे आश्रम द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘संस्कार दर्शन एवं दिव्या प्रेरणा प्रकाश’) | ( १५ मिनट )

३. ॐ कार गुंजन 

के साथ     त्राटक :

महाराज पंतजलि ने कहा है तस्य वाचक: प्रणव:  अर्थात ओम परमात्मा का वाचक है, उनकी स्वाभाविक ध्वनि है हमारे शास्त्र तो ओमकार की महिमा गाते नहीं थकते है पर आज के वैज्ञानिक भी ओमकार की महिमा से आश्चर्यचकित है | ओमकार के जप से जापक की हताशा निराशा दूर होती है, आत्मिक बल बढ़ता है और सर्वागीण विकास होता है जिससे विचारशक्ति, निर्णयशक्ति, धारणाशक्ति, अनुमानशक्ति जैसी उन्नीस प्रकार की शक्तियाँ विकसित होती है | त्राटक अर्थात भगवान या गुरु की मूर्ति को बिना पलक झपकाये एकटक देखना, इससे मन की स्थिरता, एकाग्रता, निर्भीकता, संकल्पशक्ति तथा बुद्धि का विकास होता है,वासना क्षय होनेवाली है | अत: संस्कार सभाओं में बहनों के आत्मिक विकास के लिये सामूहिक रूप से ओमकार के गुंजन के साथ गुरुमूर्ति पर त्राटक कराया जाता है|
४. श्वासोश्वास की गिनती, ध्यान : हमारे शास्रों के अनुसार ध्यान की महिमा कोटि तीर्थ, दान, यज्ञ व तपों से भी बढ़कर है ध्यान परमात्मा से एकल स्थापित करने का सरल उपाय है ध्यान से बुद्धि, सूक्ष्म बनती है,  सुषुप्त  शक्तियाँ जागृत होती है मानसिक शांति मिलती है, एकाग्रता और स्मरणशक्ति बढती है व शरीर निरोग रहता है | हमारे मन का श्वासोश्वास से और श्वासोश्वास का मन से गहरा संबंध है मन को प्रशांत करने व साधना को तीव्र गति से आगे बढ़ाने के लिये श्वासोश्वास की गिनती एक अमोघ साधन है इस प्रयोग में सहज चल रही श्वासों को साक्षी बनकर देखते जाते है, जैसे श्वास लिया तो प्राणवायु ठंडी थी छोड़ा तो गरम, श्वास लिया तो ओम का जप किया, छोड़ा तो एक गिना, पुनः ओमकार का जप किया और श्वास छोड़ते, हुये दो गिना इस प्रकार धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाते हुये तक की गिनती करते-करते मनोवृति अंतमुर्खी होती जाती है और सहजता से ध्यान में प्रवेश मिल जाता है (ध्यान के लिये पूज्यश्री के ध्यान की वी.सी.डी.चलाये) ( १० मिनट )
 
५. वीडियो सत्संग :
पूज्य बापूजी के सत्संग की वी.सी.डी. १० से १५ मिनट चलाये व ध्यान से सुने | सत्संग के बाद पाँच मिनट शांत होकर उसका चितन-मनन करे | (१० मिनट )
६. जीवन उत्थान कार्यक्रम:
प्रत्येक सप्ताह निन्मलिखित विषयों में से किसी एक विषय की जानकारी दे |
विषय: महान नारियों के जीवन – चरित्र, रजस्वला स्त्री का आचरण कैसा हो ?
ऋषि पंचमी व्रत-महिमा, संस्कारी माँ का बालक के जीवन में महत्त्वपूर्ण स्थान, दिव्य शिशु-संस्कार कैसे पाये? उत्तम संतानप्राप्ति, भारतीय वेशभूषा का महत्व, सर्वश्रेष्ठ सम्पति: शील, आभूषण-चिकित्सा, बाजारू सौंदर्य-प्रसाधनों से हानियाँ, ग्रहस्थ में शांति के उपाय, पर्व पर क्या करे? पारिवारिक स्वास्थ्य कैसे बने? प्राकृतिक आहार-विहार के नियम, कैसा हो गृहस्वामिनी का आचरण? और साधिकाओं के अनुभव आदि | (१५ मिनट)

७. व्यक्तित्व को ओजस्वी बनाना :
जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिये आवश्यकता है व्यक्तितत्व को कुशल, प्रतिभासंपन्न एवं ओजस्वी बनाने की | इसकी पूर्ति हेतु तथा युवतियों में आत्मनिर्भरता एवं आत्मविश्वास लाने के लिये युवती संस्कार सभा में विविध विषयों पर वक्तृत्व का आयोजन का भी समावेश किया गया है | जीवन उत्थान कार्यक्रम के अंतर्गत बताये विषयों पर वत्क्व्य आयोजन कराये| महीने के तीसरे सप्ताह सभा के सदस्यों को पहली तीन बैठकों में बताये विषयों पर वक्तव्य तैयार करके आने को कहे| चौथे सप्ताह उन विषयों पर सभा में ५ युवतियों ४ – ५ मिनट के लिये बोले | युवतियों का चयन एक डिब्बे में उनके नामों की पर्चियाँ डालकर करे | वक्तृत्व का विषय सामाजिक, नैतिक, आध्यात्मिक  बिंदुओं से जुड़ा हुआ हो | उसमे व्यक्ति, समाज एवं विश्व पर टिका-टिप्पणी न हो | जो चिट्ठी एक बार निकाली गयी उसे अलग से रख दे, ताकि तीन सभा तक उसी विषय पर इस युवती की बारी दुबारा न आये | इस प्रकार हर सभा में आने से पूर्व वे सभी युवतियाँ वक्तृत्व  की तैयारी करेंगी, जिनका वक्तृत्व  देना बाकी है | विषय बदलने पर पुनः सबके नाम की चिट्ठियाँ बंनाने आदि जिम्मेदारी किन्ही दो बहनों को सौंप दे | ( १५ मिनट )
अथवा
ज्ञानचर्चा :किसी एक विषय पर सामूहिक चर्चा करते हुये संकुचित दृष्टिकोण को व्यापक बनाने हेतु ‘ज्ञान-चर्चा’ का समावेश सभा में किया गया है | इसके द्वारा ज्ञान का परस्पर आदान-प्रदान होता है तथा ऐसी अनेक गुत्थियाँ जो वर्षों के व्यक्तिगत प्रयासों से नहीं सुलझ पायी थी, वे क्षणमात्र में सुलक्ष जाती है |
विषय : दुनिया में सबसे ठोस क्या है?. सब सफलताओं का मूल: आत्मबल, हमारे जीवन का लक्ष्य क्या होना चाहिये? शबरी, मीरा आदि की गुरुभक्ति, सबके मंगल में अपना मंगल, नारी–मुक्ति : भ्र एवं वास्तविकता जीवन में आध्यात्मिकता का विकास कैसे करे? ईश्वरभक्ति, गुरुभक्ति, सत्संग, सदगुरु– महिमा, श्रीमदभागवत एवं गीता-पाठ की महिमा, गुरुसेवा की महिमा, संत-दर्शन का फल, मधुर व्यवहार, सयंम, एकाग्रता, समय की कीमत, लक्ष्य-निर्धारण, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास, भारतीय संस्कृति की महिमा, पर्यावरण-सुरक्षा, गौ-रक्षा आदि में से किसी एक विषय पर सभी बहाने आपस में चर्चा करे |इस बात का विशेष ध्यान रखे की आपस में वाद-विवाद न हो | (१५ मिनट )

८. प्रश्नोत्तरी :
प्रश्नोत्तरी सत्संग व सत्साहित्य पठन पर होगी | युवतियों द्वारा जो भी पढ़ा, सुना व समझा गया उस पर विचार-विमर्श हो | शास्त्रपठन एवं पूज्य बापूजी के सत्संग से क्या सीख ली? कौन–सी चीजें अच्छी लगी और क्यों? प्रश्नोत्तरी में; जीवनचरित्र (आदर्श नारी), सदगुणों का विकास, आदर्श माँ’ आदि विषय होंगे|
नोट : (१) समय व्यर्थ न करे, उसका सार्थक उपयोग करे|
      (२) एक समय में एक ही व्यक्ति बोले | (५ मिनट)

९. प्रार्थना

व पूर्णाहुति :

सभा के अंत में कीर्तन, हास्य प्रयोग, आरती, हे प्रभु ! आनंददाता !! प्रार्थना सामूहिक रूप से करे | जीर निम्न मन्त्रों  का उच्चारण करके सभा की पूर्णाहुति करे |
‘ॐ सहनाववतु ... सहनौ भुनक्तु ....सहवीर्य करवावहै...
तेजस्विनावधीतमस्तु... मा विद्विषावहै....ॐ शांति...शांति... शांति: |’
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात पूर्णमदुच्यते  |
पूर्णस्य पूर्णमादाय पुर्नेवावशिष्यते  ||
(१० मिनट)