Aadarsh Maa Article Minimize
माता : नारी का आदर्श स्वरुप :-
माता : नारी का आदर्श स्वरुप :- धर्म (आचारसंहिता) की स्थापना भले आचार्यों ने की, पर उसे सँभाले रखना, विस्तारित करना और बच्चों में उसके संस्कारों का सिंचन करना – इन सबका श्रेय नारी को जाता ...
Read More..
माता का कर्तव्य :-
माता का कर्तव्य :- जिस घर की नारियाँ सत्यप्रिय, सदाचारी, संयमी और ईश्वरभक्त होती हैं, उसी घर में महान आत्माओं का अवतरण होता है । नारी वास्तव में शक्ति का ही स्वरूप है । यदि वह अपनी महिम...
Read More..

माँ की सीख :- Minimize
माँ की सीख :-
माँ की सीख :-

माँ की सीख :-
विश्व के सभी देशों से अधिक मानवीय संवेदना, परहित की भावना,  भगवत्श्रद्धा, दूसरों के दुःख में सहायरूप होने के संस्कार भारत में पाये जाते हैं। पाश्चात्य संस्कृति के लगातार आक्रमण के बावजूद भी सनातन संस्कृति के इन दिव्य संस्कारों का उच्छेदन नहीं हुआ, बल्कि भारतवासियों के हृदयों में, रगों में ये अभी भी समाये हुए हैं। हमारे देश में आज भी कई घरों में माताएँ प्रातःकाल बच्चों को सिखाती हैं : ‘बेटा! स्नान करके भगवान को प्रणाम करो। गौमाता को प्रणाम करो।’ ‘शाम हो गयी है, हाथ-पैर धोकर दीपज्योति जलाओ और प्रार्थना करो।’ ‘विपत्ति आये तो भगवान को पुकारो, उनके नाम का जप करो।’ आदि-आदि। इस प्रकार से हमारी संस्कार-धरोहर पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढती आयी है। आज के युग में जब हमारी संस्कृति की संस्कार-सरिता पर कुछ काई-सी छायी नजर आ रही है, ऐसे में महान माता-पिताओं तथा गुरुजनों की शिक्षाएँ अन्यों के लिए आदर्शस्वरूप सिद्ध होंगी। इसलिए ऐसे प्रसंगों की एक हृदयस्पर्शी लेखमाला शुरू की जा रही है। यह लेखमाला ‘बाल संस्कार केन्द्रों’ के संचालकों के लिए भी बच्चों में संस्कार-सिंचन हेतु लाभदायक सिद्ध होगी।



print
rating
  Comments