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बहुत सो चुकी अब तो जागो !!

बहुत सो चुकी अब तो जागो, ओ ! नारी कल्याणी....
परिवर्तन के स्वर में भर दो, निज गौरव की वाणी,

तू ही अम्बा, तू ही भवानी, तू ही मंगलकारिणी,
ओ कल्याणी.... ओ ! नारायणी.....


देवी भागवत में आया, जो वेदवती सम त्याग हो
कोई प्रलोभन डिगा न पाया, वैसा ही अनुराग हो
मोह निशा से उठकर देखो, अब तो तू सजाग हो
छूट जाए अब सारी बुराई, द्वेष न क्रोध न राग हो
व्यर्थ में बीत न जाए तेरी, अमूल्य ये जिंदगानी

तू ही अम्बा, तू ही भवानी, तू ही मंगलकारिणी,
ओ, कल्याणी, ओ ! नारायणी.....

जिजाबाई बनो देश को , वीर शिवाजी की फिर चाह
सिवा तुम्हारे कौन बताएं बलिदानी वीरों को राह
अगर न अब भी निद्रा, त्यागी होगी यह जगती गुमराह ,
वह जौहर दिखलाओ फिर से जग के मुहँ से निकले वाह वाह
रच दो अपनी गौरव गरिमा, की फिर नई कहानी

तू ही अम्बा, तू ही भवानी, तू ही मंगलकारिणी,
ओ, कल्याणी, ओ ! नारायणी.....

 



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