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ऋषि महिमा :-

ऋषि महिमा :-

भारत ऋषियों और मुनियों का देश है, यह देश सदा से ही ऋषियों के वैदिक ज्ञान और उनकी शिक्षा से इतना प्रभावित रहा है कि आज भी लोग उनके सिद्धांतो को मानते है और एक आदर्श, धार्मिक, सैद्धांतिक जीवन जीते है और अंत में मुक्ति भी पा लेते है | यंहा पर बहुत सारे ऋषि ऐसे हुए है जिन्होंने अपनी पूरी जिन्दगी  दूसरों की सेवा और भलाई में लगा दी है | ऐसे ऋषियों की पूजा वंदन करते है | इनमे से वशिष्ठ, विश्वामित्र, जमदग्नि, भरद्वाज, अत्री, गौतम और कश्यप यह आकाश के सप्तऋषि तारो के रूप में माने जाते है ताकि वो हमेशा हमें याद रहे |
     ऋषियों को मंत्रद्रष्टा भी कहा जाता है, ऋषि अपने को कर्ता नहीं मानते, वो संसार को अपने से अलग रूप में देखते है और भाव से रहित साक्षी रहते है, इसी तरह वो मंत्रो के गूढ़ रहस्य एवं उनके प्रभाव को पूरी तरह से अलग (द्रष्टा) होकर जानते है इसीलिए वो मंत्रद्रष्टा कहलाते है |
     ऋषि पंचमी के अवसर पर ऐसे ऋषियों की पूजा की जाती है | स्त्रियों को खासकर इस दिन व्रत अवश्य करना चाहिए |
    ऋषियों के दृष्टि  में स्त्री पुरुष में कोई भेद नहीं है | सब कुछ उनके लिए अपनी मुक्त आत्मा का स्वरुप है | यह त्यौहार उनके लिए है जो अपने आप को भूलते आये है | हम सह्रदय उन ऋषियों को वंदन और प्रणाम करते है जो हमारे अज्ञान को हटाने में तत्परता से लगे हुए है | जिस अज्ञान की वजह से जीव जन्म और मरण के बंधन में फंसा हुआ है और कई प्रकार की योनियों में भटकता है और दुःख पाता है |
लेकिन ऋषियों मुनियों की सच्ची पूजा उनके विचारो और अनुभव को आत्मसात करने में है और वो चाहते है :-
     भगवान की पूजा भगवान बनकर करो | ऋषि भगवदीय द्रष्टा और साक्षी भाव में रहते है उनका किसी से कोई जुडाव नहीं रहता है | वे संसार की विभिन्न परस्थितियों जैसे सुख-दुःख, लाभ-हानि, मान-अपमान, सफलता-असफलता से विचलित नहीं होते है | खुद को निरंतर अभ्यास से सत्य में, भगवदीय द्रष्टा भाव में टिकाना ही उनकी सच्ची पूजा है | उन्होंने संसार के बंधन छुड़ाने के लिए बहुत कठिन परिश्रम किया है | उन्होंने कई विशेष समारोह, सामाजिक रीतियाँ, त्यौहार और उत्सव को व्यवहार में लाये ताकि हम जिन्दगी की असलियत को देख सके और उम्र भर की अब तक की सारी कल्पनाओ को, मान्यताओ को हटा कर आत्म साक्षात्कार कर ले, हमारे आदरणीय ऋषियों की हमें पूजा करनी चाहिए ताकि हम खुदको उनके ऋण से मुक्त कर सके|



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