शिशु व माता  दोनों के लिए  लाभकारी : स्तनपान

 

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Maata Ke Dudh Ka Mahatv  >> Download

आयुर्वेद व आधुनिक विज्ञानं दोनों के अनुसार नवजात शिशु के लिए माँ का दूध ही सबसे उत्तम व सम्पूर्ण आहार है । स्तनपान से शिशु को पौष्टिक आहार के साथ-साथ माँ का प्रेम व वात्सल्य भी प्राप्त होता है, जो उसके संतुलित विकास के लिय अति आवश्यक होता है । परंतु वर्तमान में यह मान्यता बन गयी है कि स्तनपान कराने  से शारीरिक सुंदरता कम हो जाती है । इस डर से कुछ माताएँ बच्चे को स्तनपान नहीं करती, बोतल से दूध पिलाती है । परिणामस्वरुप बालक का पूर्ण विकास नहीं होता और साथ ही उन माताओं को स्तन कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का शिकार होना पड़ता है । विभिन्न प्रयोंगो के बाद अब वैज्ञानिक भी तटस्थता से स्वीकार करने लगे है कि 'स्तनपान कराने से माँ व बच्चे दोनों को लाभ होता है ।'

स्तनपान से शिशु को होनेवाले लाभ :

1) माँ के दूध में रोगप्रतिकारक तत्व भरपूर होते है,  जो शिशु की मोटापा, मधुमेह, दमा एवं अन्य कई रोगों से सुरक्षा करते है ।
जॉय कोसक के अनुसार, 'यह सिद्ध हो चुका है कि स्तनपान से शिशु की एलर्जी से सुरक्षा होती है तथा रोग-संक्रमण का खतरा कम हो जाता है ।'
माँ के दूध में पाये जानेवाले प्रतिरक्षी तत्वों के कारण  स्तनपान करनेवाले बच्चों में रोग-संक्रमण की सम्भावना 50 से 95 प्रतिशत कम होती है ।
2) बच्चों की बौद्धिक क्षमता बढती है ।
3) माँ और शिशु के बीच भावनात्मक रिश्ता मजबूत होता है ।
4) एक महीने से एक साल की उम्र तक शिशु में 'अचानक शिशु मृत्यु संलक्षण' का खतरा रहता है । माँ का शिशु को इससे बचाता है ।

स्तनपान कराने से माँ को होनेवाले लाभ :

1)    अतिरिक्त कैलोरी नष्ट व उत्साह में वृद्धी :

यह प्राकृतिक ढंग से वजन कम करने और मोटापे से बचने में मदद करता है । इससे प्रसव के बाद पेट का लटकाव भी नहीं   होता । एलिज़ाबेथ डेल के अनुसार, 'स्तनपान कराते समय माँ के शरीर में ऑक्सीटोसिन हार्मोन स्रावित होते है, जो गर्भाशय को सिकोड़कर प्रस्तुति के पूर्व के  आकर का कर  देते है  । यह हार्मोन तनावमुक्ति तथा सुख-बोध की अनुभूति भी प्रदान करता है ।'

2)    रोगों से बचाव :

जितने लम्बे समय तक माँ शिशु को अपना दूध पिलाती है, उतनी अधिक अंडाशय व स्तन के कैंसर जैसे गंभीर रोगों से उसकी रक्षा होती है । साथ ही हृदयरोग, मधुमेह तथा ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों की कमजोरी ) के खतरे कम हो जाते है ।

3)    मानसिक रोगों से बचाव :

जॉय कोसक के अनुसार, 'जो महिलाएँ स्तनपान नहीं कराती या जल्दी बंद कर देती है,  उनके मानसिक अवसाद से ग्रस्त होने की सम्भावना  अधिक होती है ।'